डीसी से लेकर चीफ सैक्रेटरी व सीएम तक इंसाफ न मिलने की बात करने वाले सरकारी कर्मचारी ने अब एसडीएम-1 व तहसीलदार-1 के ऊपर उठाए सवाल, कहा साथी रैवेन्यु अधिकारी को बचाने का हो रहा प्रयास !
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अगर किसी सरकारी कर्मचारी को अपने अधिकारियों व सरकार से इंसाफ न मिले और उसे मजबूरन देश के प्रधानमंत्री के पास गुहार लगानी पड़े तो इससे अधिक अफसोस वाली बात किसी भी देश के लिए नागरिक के लिए नहीं हो सकती। मीडिया में अपना दुख बयान करने वाले पवन कुमार जो कि जालंधर के डीसी दफ्तर में बतौर एक कर्मचारी कार्यरत हैं, ने बेहद गंभीर आरोप लगाए थे, कि वह अपने संवैधानिक अधिकारों से वंचित किए जा रहे हैं।
एक रैवेन्यु अधिकारी के खिलाफ 50 लाख रूपए जैसी बड़ी रिश्वत लेकर एक गैर-कानूनी काम करने के बेहद गंभीर आरोप लगाने के मामले में 1 साल के अंदर उसकी तरफ से 2 दर्जन से ऊपर शिकायतें की गई थी। जिसमें डीसी, विजीलैंस, प्रदेश के एफसीआर एवं चीफ सैक्रेटरी तक के पास सबूतों सहित अपनी शिकायत भेजी थी, मगर उसे इंसाफ नहीं मिला। जिसके चलते अब आखिरी उम्मीद के तौर पर उन्होंने देश के प्रधानमंत्री के पास गुहार लगाई थी। ताकि जनता के पैसों से तन्खवाह लेने वाले एक सरकारी अधिकारी द्वारा अपनी ही सरकार को चूना लगाते हुए लाखों रुपए की रिश्वत लेकर गैर-कानूनी काम करने की पड़ताल करके उसके खिलाफ बनती कानूनी कारवाई की जा सके।
अब इसी मामले में जब प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा निर्देश जारी किए जाने के बाद जांच विजीलैंस के पास पहुंच चुकी है, एक बार फिर से पवन ने अपने ही दफ्तर के एसडीएम-1 व तहसीलदार-1 के ऊपर बेहद गंभीर आरोप लगाने जैसी बात की है। उन्होंने इस संबधी बाकायदा तौर पर एक लिखित ई-मेल के माध्यम से चीफ सैक्रेटरी पंजाब, डीजीपी पंजाब, डायरैक्टर विजीलैंस ब्यूरो एवं एफसीआर पंजाब को लिखा है कि पीएमओ के आदेशानुसार उनकी शिकायत की जांच विजीलैंस ब्यूरो के एसपी स्तर के अधिकारी दिगविजय कपिल के पास भेजी गई है। मगर फिल्हाल उनकी तरफ से कोई कारवाई नहीं की गई है।
इतना ही नहीं वह निजी तौर पर एसडीएम-1 रणदीप सिंह हीर व तहसीलदार-1 स्वनदीप कौर के दफ्तर गए थे। जहां जाकर उन्हें जानकारी प्राप्त हुई कि मनदीप सिंह को 5 फरवरी तक अपना जबाव भेजने के लिए कहा गया था, मगर लगातार 1 हफ्ते से उक्त अधिकारियों के दफ्तर में आने के बावजूद आज तक जवाब नहीं भेजा गया। ऐसा प्रतीत होता है, कि दोनों अधिकारी अपने साथी रैवेन्यु अधिकारी की मदद करके उसे बचाना चाह रहे हैं, जो कि बेहद हताशाजनक है। इसलिए पवन कुमार ने उच्च-अधिकारियों को इस मामले मे निजी दखल देकर जल्द से जल्द कारवाई करने की गुहार लगाई है।
क्या है मामला, कैसे हुई थी, करप्शन, क्यों की गई थी शिकायत ?
शिकायतकर्ता पवन कुमार ने बताया कि दिसंबर 2023 से वह लगातार इस मामले की शिकायत कर रहे हैं। मगर आज तक किसी भी स्तर पर उनकी सुनवाई नहीं की गई। दरअसल उक्त अधिकारी मनदीप सिंह जो कि मौजूदा समय में नायब तहसीलदार फगवाड़ा में तैनात हैं और पहले वह नायब तहसीलदार जालंधर-1 के पद भी तैनात रहे हैं। उन्होंने 58 साल के लंबे अंतराल के बाद एक जाली सेल सर्टिफिकेट के आधार पर आबादी देह वाली ज़मीन जो कि गांव चोहकां, हदबस्त नं 218, तहसील व ज़िला जालंधर का इंतकाल (ट्रांसफर) कर दिया था। जो कि सीधे तौर पर दी पंजाब रैवेन्यु एक्ट 1887 एवं दी डिस्पोज़ड पर्सनस (कंपनसेशन एंड रिहैबिलिटेशन) एक्ट 1954 का उल्लंघन है। बार-बार पीजीआरएस पोर्टल, आरटीआई एक्ट के तहत, सीएम पंजाब, चीफ सैक्रेटरी पंजाब, विजीलैंस पंजाब, रैवेन्यु विभाग सहित कई उच्च-अधिकारियों तक हर स्तर पर शिकायतें भेजी, ताकि न्याय मिल सके। मगर हर बार उनकी शिकायत को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
पवन कुमार ने कहा कि पंजाब में IAS/IPS/PPS/PCS अधिकारियों के बीच भ्रष्टाचार के खिलाफ कारवाई करने की इच्छा-शक्ति ही समाप्त हो चुकी है और प्रदेश के सीएम द्वारा करप्शन के खिलाफ चलाया जा रहा व्हाटसएप नंबर भी अब बंद कर देना चाहिए क्योंकि यह अब केवल मात्र एक लोक-दिखावा ही बनकर रह गया है।
पवन ने कहा कि ऐसा लगता है कि उक्त नायब तहसीलदार को बतौर तहसीलदार तरक्की दिलाने के लिए ही अधिकारियों के इस कमाऊ-पूत को किसी भी तरह से बचाने का प्रयास ही किया जा रहा है।
नायब तहसीलदार मनदीप सिंह ने भी 2-3 दिन में जवाब भेजने की मानी थी बात
नायब तहसीलदार मनदीप सिंह से जब इस बारे में कई दिन पहले खबर प्रकाशित करते समय उनके बयान लेने के लिए बात की गई थी, तो उन्होंने कहा था, कि उन्होंने कोई भी गलत काम नहीं किया है। जो भी किया है वह कानून के दायरे में रहकर ही किया है। जहां तक शिकायत का सवाल है, मुझे एसडीएम दफ्तर से अपना जवाब देने के लिए पत्र मिला है। पटवारी की रिपोर्ट भी आज ही मिली है। मैं 2-3 दिन में अपना जवाब दायर कर दूंगा।
देखें पवन कुमार द्वारा उच्च-अधिकारियों के पास भेजी गई ई-मेल की कापी
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