“VIBRANT SENIORS” क्या वाकई में लड़ेंगे चुनाव, या केवल व्हाटसएप तक ही सिमटकर रह जाएगी मुहिम ?
स्थिति साफ न होने के कारण शुरू हुआ चर्चाओं का दौर !
कन्वीनर अनिल निश्चल ने शाम को दूर किया असमंजस, जानें क्या है ग्रुप की अगली रणनीति ?
जालंधर, 24 फरवरी : शहर के अति प्रतिष्ठित क्लब जिमखान में आगामी चुनावों का औपचारिक बिगुल बज चुका है। एगज़ीक्यूटिव कमेटी मीटिंग में इस बात का फैसला लिया गया है कि 14 मार्च को एजीएम आयोजित की जाएगी जिसके बाद अप्रैल महीने में चुनाव करवाए जा सकते हैं। इस खबर के आने से क्लब के बड़ी गिनती में सदस्य एक्टिव हो चुके हैं और अब क्लब के हर व्हाटसएप ग्रुप में केवल चुनावों को लेकर ही मैसज आते हुए दिखाई दे रहे हैं।
इसी बीच सीनियर सदस्योंके लिए विशेष रूप से बनाए गए ग्रुप जिसे अब VIBRANT SENIORS का नाम दिया गया है उसे सीनियर एडवोकेट पीपी सिंह आहलुवालिया (चेयरमैन) एवं अनिल निश्चल (कन्वीनर) ने शुरू किया था, ताकि क्लब के अंदर हर बार सीनियर सिटिज़नस की आवाज़ को दबाने या उनकी परेशानियों का हल न करने पर एक मंच पर विचार-विमर्श करके प्रभावी ढंग से समाधान निकाला जा सके। क्लब के यह पुराने सदस्य जो अपनी-अपनी फील्ड के गुरू रह चुके हैं अब इनके मन में यह बात घर कर चुकी है कि अगर सीनियर सिटिज़न सदस्यों की बेहतरी के लिए कुछ करना है तो उसके लिए मौदान में उतरकर चुनावी जंग जीतनी होगी, तभी इनका भला हो सकता है। इसीलिए इस बार के चुनाव में इनकी भागीदारी को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो चुकी हैं।
क्या वाकई लड़ेंगे चुनाव या फिर केवल चुनावी स्टंट और व्हाटसएप तक ही रह जाएंगे सिमटकर
मंगलवार को क्लब के अंदर एक नई चर्चा ने जन्म ले लिया कि वाईब्रैंट सीनियरज़ केवल अपनी आवाज़ बुलंद करेंगे और चुनाव लड़ने को लेकर फिल्हाल कोई फैसला नहीं लिया गया है। कुछ सदस्यों का मानना है कि हर बार चुनाव से ठीक पहले ऐसे कई ग्रुप (धड़े) हैं जो मीडिया में सुर्खियां बटोरने के लिए चुनावी स्टंट के तौर पर ऐसे बयान जारी करते हैं या फिर एक लहर बनाते हैं। मगर बाद में वह सब पारंपरिक रूप से चुनाव लड़ने वाले दोनों ग्रुपों में से किसी एक के समर्थन की घोषणा कर देते हैं। इस तरह की कई बातें क्लब के अंदर उठने लगी और शाम तक माहौल यह बन गया कि ग्रुप की सार्थकता एवं असतित्व तक सवाल खड़े कर दिए गए।
एक ही दिन में ऐसा क्या हो गया कि वाईब्रैंट सीनियरज़ से कुछ प्रतिद्दंदी लगे डरने
अब सोचने वाली बात है कि एक ही दिन में ऐसा क्या हो गया कि वाईब्रैंट सीनियरज़ से कुछ प्रतिद्दंदी डरने लगे और उन्हें अलग दिशा में प्रोपैगंडा करने की ज़रूरत पड़ गई। क्योंकि इस ग्रुप के अधिकतर सदस्य समाज में अलग-अलग जगह अपना बहुत ऊंचा स्थान बना चुके हैं और इनकी पकड़े क्लब में भी काफी अच्छी मानी जाती है। ऐसे में यह कहना भी गलत नहीं होगा कि चाहे यह लोग चुनाव लड़ें न लड़ें, मगर दिशा परिवर्तन के लिए एहम रोल अदा ज़रूर कर सकते हैं। क्योंकि अपनी वोट के साथ-साथ अपने परिवार व जान-पहचान की वोट को भी यह लोग प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं।
कैसे दूर हुआ असमंजस, क्या होगी ग्रुप की अगली रणनीति ?
ग्रुप के कन्वीनर और सीनियर सदस्य अनिल निशचल ने हाट न्यूज़ इंडिया से विशेष बातचीत में कहा कि उनका ग्रुप इस बार चुनाव लड़ने को लेकर काफी गंभीर है। क्योंकि अगर उनके ग्रुप से कोई सदस्य क्लब प्रबंधन का हिस्सा रहता है तो उस सूरत में प्रभावी ढंग के साथ सीनियर सदस्यों का पक्ष कार्यकारिणी के सामने रखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि ज़रूरी नहीं है कि हम कोई THIRD FRONT बनाएं, हमारी तरफ से सर्वसम्मित के साथ एक या एक से अधिक पदों पर भी चुनाव लड़ा जा सकता है। हमारे कुछ एहम सदस्य विदेश में हैं और वह एजीएम से पहले वापिस आ जाएंगे। उनके आने पर विशेष मीटिंग करने के उपरांत हम एक प्रैस वार्ता करके अपने ग्रुप की अगली रणनीति की सार्वजनिक घोषणा करेंगे। तब तक क्लब के अंदर जो लोग ग्रुप को लेकर गलत बातें फैला रहे हैं, उन्हें ऐसा करने से साफ तौर पर गुरेज करना चाहिए।
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