धीरज सेठ को क्या किसी तगड़ी साजिश के तहत प्रोग्रेसिव ग्रुप से किया गया दरकिनार ?
'विपन झांजी' के पक्ष में हवा बनाकर क्या अंतिम समय में 'अमित कुकरेजा' की हो सकती है बतौर सेक्रेटरी उम्मीदवार 'एंट्री'?
क्या मौजूदा टीम का हिस्सा रहे 'सौरभ खुल्लर' भी बदलेंगे अपना 'पासा', दूसरे ग्रुप से लड़ेंगे 'चुनाव'?
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जालंधर, 7 मार्च : जिमखाना क्लब के आगामी चुनावों को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। हाल ही में धीरज सेठ को प्रोग्रेसिव ग्रुप से दरकिनार किए जाने के ऐलान के बाद क्लब के अंदर चर्चाओं का बाजार गर्म है। क्लब के सदस्यों के बीच कई तरह के सवाल उठ रहे हैं और हर कोई इन सवालों के जवाब तलाशने में जुटा हुआ है। हालात ऐसे हैं कि कुछ संभावित उम्मीदवार भी असमंजस की स्थिति में दिखाई दे रहे हैं और उन्हें यह तय करने में मुश्किल हो रही है कि आखिर उन्हें किस ग्रुप से और किस पद पर चुनाव लड़ना है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच तीन बड़े सवाल क्लब के गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बने हुए हैं। पहला, क्या धीरज सेठ को किसी सुनियोजित साजिश के तहत प्रोग्रेसिव ग्रुप से दरकिनार किया गया? दूसरा, क्या विपन झांजी के पक्ष में माहौल बनाकर अंतिम समय में अमित कुकरेजा को सेक्रेटरी पद का उम्मीदवार बनाया जा सकता है ? और तीसरा, क्या मौजूदा टीम का हिस्सा रहे सौरभ खुल्लर भी अपना पाला बदलकर दूसरे ग्रुप से चुनाव लड़ सकते हैं ?
क्लब सूत्रों की मानें तो इस पूरे घटनाक्रम के पीछे केवल एक साधारण निर्णय नहीं बल्कि एक सोची-समझी रणनीति काम कर रही थी। सूत्रों का दावा है कि इसकी पटकथा पिछले चुनावों के समय ही लिख दी गई थी। बताया जा रहा है कि क्लब की सत्ता पर काबिज होने के लिए प्रोग्रेसिव ग्रुप ने उस समय विरोधी खेमे के एक प्रभावशाली उम्मीदवार के साथ समझौता किया था, जिसके चलते अपने ही ग्रुप के एक संभावित उम्मीदवार की बलि दी गई।
सूत्रों के अनुसार उस समय विरोधी पक्ष के उम्मीदवार को यह भरोसा भी दिलाया गया था कि अगले चुनावों में उसे सेक्रेटरी पद का उम्मीदवार बनाया जाएगा। चर्चाएं हैं कि उसी रणनीति के तहत पहले विपन झांजी का नाम आगे बढ़ाया गया, ताकि धीरज सेठ को इस दौड़ से बाहर किया जा सके। कहा यह भी जा रहा है कि विपन झांजी, जो कि मौजूदा सेक्रेटरी संदीप बहल (कुक्की) के काफी करीबी माने जाते हैं, उनके कहे को टालना मुश्किल समझते हैं। ऐसे में अंतिम समय में समीकरण बदलते हुए झांजी को मनाकर उनकी जगह अमित कुकरेजा को सेक्रेटरी पद का उम्मीदवार घोषित किया जा सकता है।
सूत्रों का यह भी कहना है कि विपन झांजी की तुलना में अमित कुकरेजा को अधिक मजबूत और प्रभावशाली उम्मीदवार माना जाता है। इसी कारण उन्हें अपने पाले में लाने के लिए पहले ही अंदरखाते बातचीत और सेटिंग किए जाने की चर्चा भी क्लब के भीतर जोरों पर है। कुछ लोगों का मानना है कि इस पूरे घटनाक्रम की असली तस्वीर एजीएम के बाद ही साफ हो पाएगी।
वहीं दूसरी ओर कैशियर पद के संभावित उम्मीदवार सौरभ खुल्लर को लेकर भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। क्लब के कुछ सदस्य उन्हें प्रोग्रेसिव ग्रुप का उम्मीदवार मान रहे हैं, जबकि कुछ का कहना है कि वह एचीवर्स ग्रुप से चुनाव मैदान में उतर सकते हैं। इस संबंध में हाट न्यूज़ इंडिया से विशेष बातचीत में सौरभ खुल्लर ने स्वीकार किया कि उन्हें दोनों पक्षों से प्रस्ताव मिले हैं, लेकिन अंतिम फैसला वह अपने परिवार से चर्चा करने के बाद ही लेंगे। फिलहाल जिमखाना क्लब के चुनावों को लेकर बनते-बिगड़ते समीकरणों ने माहौल को काफी दिलचस्प बना दिया है।
हालांकि आने वाले दिनों में कौन किस पद से और किस ग्रुप के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरता है, यह तो समय ही बताएगा, लेकिन इतना तय है कि क्लब की अंदरूनी राजनीति, वायदों से मुकरने और अपने ही साथियों को किनारे लगाने जैसे आरोपों ने सदस्यों के बीच नाराजगी का माहौल जरूर पैदा कर दिया है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर यही हालात बने रहे तो इसका असर आगामी चुनावों के नतीजों पर भी देखने को मिल सकता है।
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