विश्व की सबसे बड़ी समाजसेवी संस्था लायंस क्लब में खींचतान लगातार जारी, एक साल बाद भी खत्म नहीं हुई गुटबाज़ी !
इंटरनेशनल प्रैज़ीडैंट की मौजूदगी में हुए बड़े समारोह का भी कई बड़े चेहरों सहित बहुत क्लबों ने किया बहिष्कार !
पिछले साल पूर्व व तत्कालीन गवर्नर के बीच शुरू हुआ विवाद अब भी बना हुआ है चर्चा का विषय !
जालंधर, 7 मार्च : पूरे विश्व में समाज सेवा के कार्यों के लिए अग्रणी मानी जाने वाली संस्था लायंस क्लब के अंदर चल रही अंदरूनी खींचतान एक साल बाद भी खत्म होती नजर नहीं आ रही। समाज सेवा और सामाजिक एकता का संदेश देने वाली इस संस्था में अब भी गुटबाज़ी और राजनीति हावी दिखाई दे रही है। हालात ऐसे हैं कि बड़े-बड़े कार्यक्रम भी इस अंदरूनी खींचतान की भेंट चढ़ रहे हैं। शनिवार 7 मार्च को लायंस क्लब के इंटरनेशनल प्रैज़ीडैंट एपी सिंह की अध्यक्षता में जालंधर के स्थानीय बल्ले-बल्ले फार्म में समाज सेवा से संबंधित एक भव्य समारोह आयोजित किया गया। मगर हैरानी की बात यह रही कि इस कार्यक्रम में शामिल होने को लेकर भी क्लब के भीतर दो गुट आमने-सामने दिखाई दिए।
जानकारी के अनुसार इस कार्यक्रम का आयोजन करने वाले गुट के अलावा एक बड़ा गुट ऐसा भी था, जिसकी लंबे समय से इन लोगों के साथ अनबन चली आ रही है। इसी कारण जालंधर के कई बड़े चेहरे, कई क्लब, कई सदस्य और कई पदाधिकारियों ने इस समारोह का सीधे तौर पर बहिष्कार कर दिया। स्थिति यहां तक पहुंच गई कि लायंस क्लब के कई व्हाट्सएप ग्रुपों में इस कार्यक्रम की जानकारी तक साझा नहीं की गई, ताकि अधिकतर सदस्य इससे अनजान ही रहें। हालांकि इसके बावजूद जालंधर के कुछ लायन सदस्य बगावत करते हुए कार्यक्रम में पहुंच गए।
बताया जा रहा है कि इनमें कुछ ऐसे चेहरे भी शामिल थे, जो आगामी कार्यकाल में पदाधिकारी बनने वाले हैं। कुछ सदस्य ऐसे भी थे जिन्हें संस्था के अंदर चल रही राजनीति या गुटबाज़ी के बारे में जानकारी नहीं थी। वे समारोह में पहुंचे जरूर, मगर वहां की स्थिति देखकर थोड़ी देर बाद ही वापस लौट गए। दरअसल यह समारोह लायंस क्लब जालंधर के मौजूदा प्रधान के पैलेस में आयोजित किया गया था, जिसके कारण कई सदस्यों को लगा कि इसके आयोजन में लायंस क्लब जालंधर की मुख्य भूमिका है। मगर मौके पर जाकर कई सदस्यों को वास्तविक स्थिति कुछ और ही नजर आई।
क्या था पिछले साल का विवाद ?
दरअसल लायंस क्लब के अंदर यह खींचतान कोई नई नहीं है। करीब एक साल पहले भी संस्था के अंदर बड़ा विवाद सामने आया था, जब लायंस क्लब डिस्ट्रिक्ट 321-डी के तत्कालीन गवर्नर डॉ. सुरेंद्र पाल सोंधी और मौजूदा गवर्नर रछपाल सिंह बच्चाजीवी के बीच खुली टकराव की स्थिति बन गई थी। सूत्रों के अनुसार विवाद उस समय शुरू हुआ जब पूर्व गवर्नर द्वारा “मार्क्स 2024” नाम से एक समारोह आयोजित करने के लिए विभिन्न व्हाट्सएप ग्रुपों में निमंत्रण पत्र भेजा गया। इस निमंत्रण पत्र को लेकर मौजूदा गवर्नर ने कड़ा एतराज जताया और सार्वजनिक तौर पर सदस्यों से इस समारोह का बहिष्कार करने की अपील कर दी। मौजूदा गवर्नर का आरोप था कि उनकी अनुमति के बिना कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है और निमंत्रण पत्र पर उनकी तस्वीर का इस्तेमाल भी बिना सहमति के किया गया है, जो संस्था के नियमों के खिलाफ है। विवाद यहीं नहीं रुका। इसी दौरान पूर्व गवर्नर पर एक सदस्य की ओर से दी गई 50 हजार रुपये की दान राशि के गबन का आरोप लगाते हुए शिकायत पत्र भी सार्वजनिक कर दिया गया था, जिससे मामला और ज्यादा तूल पकड़ गया था।
समाज सेवा से ज्यादा राजनीति पर चर्चा
एक साल बाद भी हालात में खास बदलाव नहीं आया है। संस्था के भीतर अलग-अलग गुट सक्रिय हैं और कई कार्यक्रमों में यह अंदरूनी खींचतान खुलकर सामने आ रही है। समाज सेवा और एकता का संदेश देने वाली इस अंतरराष्ट्रीय संस्था के भीतर लगातार सामने आ रही गुटबाज़ी अब न केवल सदस्यों बल्कि आम लोगों के बीच भी चर्चा का विषय बन चुकी है। अब देखना यह होगा कि लायंस क्लब के वरिष्ठ पदाधिकारी इस अंदरूनी विवाद को खत्म कर संस्था को फिर से उसके मूल उद्देश्य समाज सेवा और सामाजिक एकता की ओर ले जा पाते हैं या नहीं।
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