चिर-प्रतिद्वंदी ग्रुपों "PROGRESSIVE" और "ACHIEVERS" के गठन की राह नहीं आसान !
सैक्रेटरी, जूनियर वाईस प्रधान व ज्वाईंट सैक्रेटरी पद पर उम्मीदवारों को लेकर नहीं बन रही आमराय
दोनों ग्रुपों के किंगमेकर समस्या का हल ढूंढने के लिए जल्दी शुरू करेंगे कवायद
"THIRD FRONT" के गठन का चांस काफी कम, सशक्त लीडरशिप के अभाव में बदलाव के इच्छुक इस बार भी होंगे निराश
जालंधर, 26 फरवरी : शहर के अति-प्रतिष्ठिक क्लब जिमखाना के सदस्य जिसमें शहर के गणमान्य, अलग-अलग क्षेत्रों के दिग्गज, प्रसिद्व उद्योगपति एवं क्लब की पूरी राजनीति को पलटने की क्षमता रखने वाले रसूखदार तक शामिल हैं। इस क्लब में चुनाव किसी भी विधानसभा या लोकसभा चुनावोें से अधिक रोचक होते हैं। लाखों-करोड़ों रूपए चंद हज़ार सदस्यों वाले इस क्लब में वोट लेने के लिए खर्च कर दिए जाते हैं। यहां पिछले लंबे समय से हर बार चुनावों के अंदर दो चिर-प्रतिद्वंदी ग्रुपों "PROGRESSIVE" और "ACHIEVERS" के बीच ही मुकाबला होता रहा है। और दोनों ग्रुपों से अलग-अलग पदों पर जीतकर आने वाले पदाधिकारी 2 साल एक साथ मिलकर काम करते हैं।
इस बार फिल्हाल दोनों ग्रुपों के गठन को लेकर काफी असमंजस देखने को मिल रहा है, क्योंकि चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की तस्वीर साफ तौर पर नज़र नहीं आ रही है। सैक्रेटरी, जूनियर वाईस प्रधान व ज्वाईंट सैक्रेटरी के पद पर दोनों ग्रुपों में एक से अधिक चाहवान होने के कारण किसी प्रकार का ठोस निर्णय नही लिया जा सका है। क्लब सूत्रों की मानें तो दोनों ग्रुपों के किंगमेकर जो क्लब की राजनीति में उल्टफेर करने का दावा करते हैं, वह बहुत जलदी ही इस बात की कवायद शुरू करने जा रहे हैं कि किसी तरह से सभी चाहवान उम्मीदवारों में एक आमराय बनाकर सर्वसम्मति से उम्मीदवारों का चयन किया जा सके, ताकि किसी प्रकार के त्रिकोणीय मुकाबले से बचा जा सके।
क्लब सूत्रों के अनुसार जहां सैक्रेटरी पद पर प्रो. विपिन झांजी, अमित कुकरेजा, तरूण सिक्का, राजू विर्क, अनु माटा, धीरज सेठ और सुमित शर्मा के बीच होड़ लगी हुई है। वहीं दूसरी तरफ एगज़ीक्यूटिव सदस्य हरप्रीत सिंह गोल्डी का मन ज्वाईंट सैक्रेटरी पद पर चुनाव लड़ने का है।
इसी तरह से जूनियर वाईस प्रधान पद के लिए राजीव बंसल, महिंदर सिंह का नाम भी सामने आ रहा है। इसी तरह से शालीन जोशी जिनकी पहचान काफी मज़बूत उम्मीदवार के तौर पर है उनका नाम भी ऊपरी पदों के लिए लिया जा रहा है।
पर्ची सिस्टम भी नहीं आया काम, सैक्रेटरी पद पर घमासान जारी
क्लब सूत्रों की मानें तो कुछ दिन पहले एक ग्रुप के कुछ सदस्य इकट्ठा हुए थे, जहां एक सदस्य ने हल्के अंदाज़ में सुझाव दिया कि सभी के नाम की एक पर्ची डाल देते हैं, जिसकी पर्ची निकलेगी, उसे उम्मीदवार माना जाएगा। जब सभी की सहमति से पर्ची डाली गई तो एक चाहवान के नाम की पर्ची न निकलने पर उसने साफ तौर पर मना कर दिया और कहा कि उसे यह फैसला मंज़ूर नहीं है और वह अपने परिवार के साथ बात करके अपना फैसला बताएगा।
दिग्गज़ के पास अपने हक में मांगने गए आशीर्वाद, मिला देरी से आने का जवाब
क्लब सूत्रों की मानें तो सैक्रेटरी पद के एक चाहवान मौजूदा समय में क्लब के अंदर काफी महत्वपूर्ण जगह रखने वाले दिग्गज के पास गए और अपने हक में आशीर्वाद मांगा तो उन्हें जवाब मिला की आप बहुत देरी से आए हो, अब जब एजीएम की घोषणा हो गई तो आपको मेरी याद आ गई। आपको पहले आना चाहिए था। अब मैदान में कई नए खिलाड़ी आ गए हैं और उनको लेकर सदस्यों में अच्छी राय तक बननी आरंभ हो चुकी है।
"THIRD FRONT" के गठन का चांस काफी कम, सशक्त लीडरशिप के अभाव में बदलाव के इच्छुक इस बार भी होंगे निराश
वहीं दूसरी तरफ हर बार चुनावों से पहले एक खास वर्ग द्वारा की जाने वाली कोशिश जिसे "THIRD FRONT" के गठन का नाम दिया जाता है, उसका चांस इस बार भी हर बार की तरफ नां के बराबर ही नज़र आ रहा है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस तीसरे ग्रुप के गठन की सबसे बड़ी बाधा है क्लब में बदलाव की बातें करने वाले और कुछ नया करने के इच्छुक सदस्यों में एक सशक्त लीडरशिप की भारी कमी है। जिस वजह से हर बार पुराने ग्रुप बाज़ी मार लेते हैं और तीसरे ग्रुप की आवाज़ बुलंद करने वालों को या तो अपने ग्रुपों में शामिल कर लिया जाता है, या फिर उन्हें साम-दाम-दंड और भेद की नीति अपनाते हुए मैदान से बाहर कर दिया जाता है।
रूप-टाप पर हुई मीटिंग की खूब चर्चा, नहीं हुआ कोई फैसला
इसी बीच क्लब सूत्रों के अनुसार हाल ही में क्लब के रूफ-टाप पर हुई एक खास मीटिंग की भी क्लब में खूब चर्चा हो रही है। जहां बेहद गुप-चुप ढंग से एक चाहवान ने दूसरे चाहवान को मैदान से हटने के लिए मनाने का खूब प्रयास किया और कहा कि वह अगली बार उसके हक में पूरा साथ देंगे और उन्हें जिताने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेंगे, मगर दूसरे चाहवान ने उनकी बात मानने से साफ तौर पर इंकार कर दिया। और कहा कि वह पहले ही ज़मीनी स्तर पर काम शुरू कर चुके हैं, ऐसे में पीछे हटना संभव नहीं है।
एक चाहवान उम्मीदवार ने बिना किसी ग्रुप के अकेले ही शुरू किया प्रचार
इसी बीच मौजूदा कार्यकारिणी का एहम हिस्सा एवं क्लब की राजनीति के एक जाने-माने एवं बेहद मज़बूत चेहरे ने बिना किसी ग्रुप के ही अकेले अपना चुनाव प्रचार करना आरंभ कर दिया है। प्रतिदिन कई सदस्यों से मिलने व फोन काल करने से उनके विरोधियों के पैरों तले ज़मीन भी खिसकनी आरंभ हो चुकी है, क्योंकि उन्हें हराना लोहे के चने चबाने समान बना हुआ है।
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