फगवाड़ा गेट का हाईप्रोफाईल MK TRADING CO. बिल्डिंग मामला और गरमाया !
सत्तापक्ष के दो बड़े नेताओं की भूमिका चर्चा में !
नोटिस के बाद बढ़ी सियासी हलचल, एक पक्ष बचाने में तो दूसरा कार्रवाई के पक्ष में सक्रिय !
जालंधर, 6 मार्च : फगवाड़ा गेट स्थित विवादित MK TRADING CO. बिल्डिंग को लेकर प्रकाशित खबर के बाद मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। नगर निगम द्वारा बिल्डिंग मालिक को नोटिस जारी किए जाने के बाद अब इस पूरे प्रकरण में सियासी रंग भी खुलकर सामने आने लगा है। निगम सूत्रों के अनुसार इस हाई-प्रोफाइल मामले में सत्तापक्ष के दो बड़े नेताओं की भूमिका भी चर्चा में है। सूत्रों का दावा है कि जहां एक प्रभावशाली नेता बिल्डिंग मालिक के पक्ष में खड़े होकर उसे बचाने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सत्तापक्ष का ही एक अन्य बड़ा नेता इस मामले में कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करवाने के लिए दबाव बना रहा है। इसी कारण यह मामला अब प्रशासनिक ही नहीं बल्कि राजनीतिक स्तर पर भी बेहद संवेदनशील बन गया है।
हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है मामला जानकारी के अनुसार कुछ समय पहले शहर के एक आरटीआई एक्टिविस्ट द्वारा माननीय पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में दायर की गई एक याचिका में भी इस बिल्डिंग का जिक्र किया गया था। याचिका में शहर में हो रहे अवैध निर्माणों का मुद्दा उठाते हुए इस बिल्डिंग की स्थिति और कार्रवाई को लेकर भी सवाल खड़े किए गए थे।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इस पूरे मामले का राजनीतिकरण भी जानबूझकर किया जा रहा है, इस बात की संभावना भी जताई जा रही है कि सत्तापक्ष नेताओं को बदनाम करने की नीयत से शहर में ऐसी बातें फैलाई जा रही हैं, ताकि विवादित बिल्डिंग के साथ इनका नाम जोड़कर इनकी छवि को नुक्सान पहुंचाया जा सके। वैसे फिल्हाल कौन सही है और कौन गल्त इसका फैसला करना संभव नहीं है, मगर इतना सच है कि इस बिल्डिंग के लेकर नगर निगम के अधिकारियों की रातों की नींद ज़रूर उड़ चुकी है और अगर जल्दी ही इसको लेकर कोई ठोस कदम नही उठाया गया तो आने वाले समय में इसका बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।
2019 में सील हुई बिल्डिंग कैसे खुली ?
इस मामले का सबसे बड़ा सवाल अभी भी यही बना हुआ है कि वर्ष 2019 में नगर निगम द्वारा सील की गई यह बिल्डिंग आखिर कैसे और किसके आदेश से खुली। निगम के रिकॉर्ड में आज भी यह बिल्डिंग ‘सील’ दर्ज बताई जा रही है, जबकि मौके पर न केवल गतिविधियां चल रही हैं बल्कि तीसरी मंजिल तक निर्माण खड़ा होने की बात भी सामने आ चुकी है। सूत्रों के अनुसार इस बिल्डिंग की बेसमेंट को लेकर भी शिकायतें पहले दी जा चुकी हैं, जिनमें नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया था। यदि इन शिकायतों की गंभीरता से जांच होती है तो कई और तकनीकी व प्रशासनिक खामियां सामने आ सकती हैं।
अधिकारी भी फूंक-फूंक कर रख रहे कदम
मामला मीडिया में आने के बाद नगर निगम के अधिकारी भी अब फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं। बताया जा रहा है कि यह मामला केवल अवैध निर्माण तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि इसके साथ जुड़े कथित लाखों रुपये के लेन-देन की चर्चाओं के कारण भी इस पर ऊंचे स्तर पर नजर रखी जा रही है। नगर निगम के भीतर भी इस बात की चर्चा है कि यदि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच होती है तो यह मामला सील तोड़ने, अवैध निर्माण, रिकॉर्ड में हेराफेरी और अधिकारियों-राजनीतिक संरक्षण जैसे कई गंभीर पहलुओं को उजागर कर सकता है।
जल्द हो सकते हैं नए खुलासे
फिलहाल शहर की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि नोटिस के बाद बिल्डिंग मालिक की ओर से क्या जवाब दिया गया है और नगर निगम प्रशासन इस मामले में आगे क्या कदम उठाता है। सूत्रों का मानना है कि जिस तरह यह मामला लगातार नए आयाम ले रहा है, उससे आने वाले दिनों में कई बड़े नामों और नए खुलासों से इंकार नहीं किया जा सकता।
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