MARITON की चमक पर दाग: साझेदारों की जंग, गिरती साख और डगमगाता भरोसा !
जालंधर : DOABA के चर्चित होटलों में गिना जाने वाला HOTEL MARITON, JALANDHAR इन दिनों अपनी सर्विस या लग्ज़री नहीं, बल्कि अंदरूनी कलह और विवादों के कारण सुर्खियों में है। 12 फरवरी की रात साझेदारों के बीच हुई तीखी झड़प ने न सिर्फ होटल की ब्रांड इमेज को चोट पहुंचाई है, बल्कि मार्केट वैल्यू और ग्राहकों के भरोसे पर भी सीधा असर डाला है।
शुरुआत से ही विवादों की परछाई
होटल की स्थापना के समय इसे हाई-एंड बैंक्वेट और कॉरपोरेट इवेंट्स का नया केंद्र बताया गया था। शुरुआती महीनों में बुकिंग फुल, पार्टियां हाउसफुल और रूम ऑक्यूपेंसी रिकॉर्ड स्तर पर रही। मगर जानकार बताते हैं कि प्रबंधन और हिस्सेदारी को लेकर असहमति का सिलसिला तभी से शुरू हो गया था। करीब दो साल पहले DOABA के चर्चित बिल्डर और बिज़नेस डेवलपर सिमरदीप सिंह ठुकराल को सभी पार्टनर्स की सहमति से एम.डी. बनाया गया। उनके कार्यकाल में होटल ने मार्केट में तेज़ी से पकड़ बनाई और प्रॉफिट ग्राफ ऊंचा गया। लेकिन 2024 के दौरान हिस्सेदारी समीकरण बदले, बताया जाता है कि 15% हिस्सेदार गौतम कुकरेजा और 5% हिस्सेदार यश दुआ ने 36% हिस्सेदारी वाले परमजीत मरवाहा के साथ हाथ मिलाया और प्रबंधन में बदलाव हो गया। ठुकराल ने अपना शेयर लेकर अलग राह पकड़ ली, पर इसके बाद से “पाई-पाई के हिसाब” पर तकरार तेज़ हो गई।
100 करोड़ से 50 करोड़ तक - वैल्यू पर चोट
सूत्रों के अनुसार, एक समय होटल के लिए 100 करोड़ तक की डील की चर्चाएं थीं। मगर ताज़ा घटना के बाद संभावित खरीदारों ने कदम पीछे खींच लिए हैं। कहा जा रहा है कि अब 50 करोड़ की पेशकश पर भी ठोस सहमति नहीं बन पा रही। बाजार विशेषज्ञ मानते हैं कि ब्रांड इमेज पर दाग लगते ही हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में वैल्यूएशन तेजी से गिरती है, और यही MARITON के साथ होता दिख रहा है।
12 फरवरी की रात : चिंगारी से शोला
घटना वाली रात एक निजी फंक्शन के दौरान एम.डी. द्वारा “निरीक्षण” को लेकर तनातनी शुरू हुई। एक पक्ष का कहना है कि यह महज़ क्वालिटी चेक था, जबकि दूसरे पक्ष ने इसे अनावश्यक दखल बताया। महिलाओं के सम्मान से जुड़ी कथित टिप्पणी की भी चर्चा है, जिसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई। मामला इतना बढ़ा कि बहस हाथापाई तक पहुंच गई। अगले दिन प्रेस के सामने इसे अलग-अलग एंगल से पेश किया गया कहीं धार्मिक भावनाओं का हवाला, तो कहीं महिला सम्मान का मुद्दा।
“गुप्त रिपोर्टिंग” और अविश्वास की दरार
आंतरिक सूत्रों का दावा है कि फंक्शन के दौरान व्हाट्सएप पर लगातार अपडेट्स दिए जा रहे थे, जिसके बाद अचानक निरीक्षण हुआ। इससे साझेदारों के बीच अविश्वास और गहरा गया। गौतम कुकरेजा की भूमिका भी चर्चा में है, वे प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक पक्ष के साथ दिखे, मगर घटना के समय कथित तौर पर मूकदर्शक रहे। अब सबकी नजर इस बात पर है कि कानूनी मोर्चे पर कौन किसके साथ खड़ा होगा।
ग्राहकों की चिंता और बुकिंग पर असर
हिंसक घटना के बाद होटल में पुलिस की आवाजाही बढ़ी। नतीजा—कई बुकिंग्स पर पुनर्विचार, कुछ कैंसिलेशन और नई बुकिंग्स “रिव्यू मोड” में। शहरवासियों के बीच चर्चा है कि मालिकों की आपसी लड़ाई कहीं उनके कार्यक्रमों पर असर न डाल दे। पहले एक बड़े होटल के सील होने से MARITON को अतिरिक्त काम मिला था, पर अब खुद इसकी साख पर सवाल हैं।
चोली-दामन का रिश्ता: MARITON और विवाद
स्थापना से लेकर अब तक, होटल का नाम समय-समय पर हिस्सेदारी, प्रबंधन और लाभ बंटवारे को लेकर विवादों से जुड़ता रहा है। हर बार समझौते की खबर आई, मगर दरारें गहरी होती गईं।
हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री में भरोसा ही सबसे बड़ा पूंजी होता है—और जब वही डगमगाने लगे, तो क्रेज़ कम होना तय है। शहर में अब चर्चा लग्ज़री या मेन्यू की नहीं, बल्कि “अगला कदम क्या होगा?” की है।
आगे क्या ?
कानूनी प्रक्रिया, साझेदारों की रणनीति और ग्राहकों की प्रतिक्रिया तीनों मिलकर तय करेंगे कि MARITON अपनी चमक वापस ला पाएगा या नहीं। फिलहाल इतना तय है कि ब्रांड की साख को लगे ताज़ा झटकों ने इसकी मार्केट पोजिशन को गहरा आघात पहुंचाया है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या साझेदार आपसी मतभेद सुलझाकर भरोसा बहाल कर पाएंगे, या यह विवाद DOABA के इस चर्चित होटल की पहचान को स्थायी नुकसान पहुंचाएगा।
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