जालंधर: मैरिटन होटल निर्माण विवादों में, 5 करोड़ का बिजली बिल बकाया – PSPCL ने लगाई रोक
5 करोड़ के बिजली बिल बकाया पर PSPCL की सख्ती, निर्माण पर रोक
जालंधर। नेशनल हाईवे पर स्थित मैरिटन होटल (Mariton Hotel) के साथ चल रहा निर्माण अब बड़े विवाद में फंस गया है। आरोप है कि जिस जमीन पर निर्माण किया जा रहा है, उस पर पहले मौजूद फैक्ट्री का करीब 5 करोड़ रुपये का बिजली बिल अब तक बकाया है।
फैक्ट्री के नाम जमीन, होटल का निर्माण!
जानकारी के मुताबिक, इस जमीन पर पहले M/S R ESS IRON & STEEL PVT LTD की फैक्ट्री थी। हैरानी की बात यह है कि जमीन आज भी उसी फैक्ट्री के नाम पर दर्ज है, जबकि होटल मैरिटन के प्रबंधकों द्वारा वहां निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया।
Invest Punjab की चिट्ठी से मचा हड़कंप
RTI एक्टिविस्ट करणप्रीत सिंह की शिकायत के बाद Invest Punjab के एडिशनल चीफ एग्जीक्यूटिव अफसर ने PSPCL के चीफ इंजीनियर को पत्र लिखकर साफ निर्देश दिए हैं कि
पहले बकाया बिजली बिल की वसूली की जाए, उसके बाद ही किसी तरह का निर्माण हो।
5.03 करोड़ रुपये का बिजली बिल बकाया
PSPCL के अनुसार,
मूल बिजली बिल: ₹3,02,08,269
ब्याज: ₹2,01,61,289
कुल बकाया: ₹5,03,69,558
PSPCL द्वारा नोटिस जारी करने के बावजूद अब तक यह रकम जमा नहीं करवाई गई।
रजिस्ट्री पर रोक, फिर भी निकाला “नया रास्ता”
शिकायतकर्ता का आरोप है कि जिला प्रशासन ने जमीन की रजिस्ट्री पर पहले से रोक लगा रखी है। इसके बावजूद:
120 मरले की जमीन को लीज दिखाकर सौदा किया गया
पहले दिनेश कत्याल, फिर होटल मैरिटन के पार्टनर गौतम कुकरेजा के नाम लीज ट्रांसफर हुई
इस पूरे खेल में फैक्ट्री मालिक और होटल प्रबंधन की सांठगांठ का आरोप
PSPCL का साफ संदेश – पहले भुगतान, फिर निर्माण
PSPCL के चीफ इंजीनियर ने दो टूक कहा है कि
जब तक 5 करोड़ रुपये से ज्यादा का बकाया बिजली बिल जमा नहीं होता, तब तक वहां किसी भी तरह का निर्माण नहीं किया जा सकता।
प्रशासन की नजर, जांच तेज
मामले की शिकायत मुख्यमंत्री कार्यालय, नगर निगम जालंधर और Invest Punjab तक पहुंच चुकी है। अब प्रशासनिक और बिजली विभाग की सख्ती के बाद निर्माण कार्य पर पूरी तरह ब्रेक लग चुका है।
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