जिमखाना क्लब की AGM टली, चुनावों पर सस्पेंस बरकरार !
जालंधर, 21 मार्च : शहर के अति-प्रतिष्ठित जिमखाना क्लब जिसे सदस्यों द्वारा सैकिंड होम का नाम भी दिया जाता है, यहां होने वाले चुनाव न केवल क्लब बल्कि पूरे शहर में चर्चा का विषय बने रहते हैं। ऐसे में शहर की एलीट क्लास के बीच चुनावों को लेकर उत्सुक्ता बनी रहना जायज़ ही है। 14 मार्च को होने वाली एजीएम (ऐन्युल जनरल मीटिंग) के स्थगित होने के बाद अब क्लब सदस्यों के बीच इस बात को लेकर जिज्ञासा बनी हुई है कि आखिर एजीएम कब होगी ? क्योंकि क्लब प्रधान कम डिवीज़नल कमिशनर जिनके पंजाब एन्वैस्ट कार्यक्रम में व्यस्तता के चलते एजीएम स्थगित की गई थी, अब एक बार फिर से लंबे समय के लिए दोबारा व्यस्त हो गए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार वैस्ट बंगाल चुनावों में उनकी ड्यूटी लगाई गई है और अब वह मई के दूसरे हफ्ते में ही उपलब्ध हो सकेंगे।ऐसे में एजीएम क्या मई में होगी या फिर पहले आयोजित की जाएगी इसको लेकर सदस्यों के बीच असमंजस बरकार है।
क्या कहता है क्लब संविधान ?
जिमखाना क्लब संविधान के अनुसार जो भी अधिकारी बतौर डिवीज़नल कमिशनर पदभार संभालता है वह आधिकारिक तौर पर क्लब प्रधान बनता है और जो भी अधिकारी बतौर डिप्टी कमिशनर पदभार संभालता है, वह आधिकारिक तौर पर सीनियर वाईस प्रधान बन जाता है।
इसी संविधान के रूल नं 50 के अनुसार क्लब में हर 2 साल के बाद चुनाव आयोजित किए जाते हैं और जो भी कार्यकारिणी चुनकर आती है,उसका कार्यकाल 2 साल का होता है।उससे एक दिन भी अधिक इस कार्यकाल को बढ़ाया नहीं जा सकता।
वहीं संविधान के रूल नं 28 के अनुसार अगर एजीएम में किसी कारणवश क्लब प्रधान कम डिवीज़नल कमिशनर उपलब्ध नहीं होते हैं तो ऐसी सूरत में सीनयर वाईस प्रधान कम डीसी के पास पूरा अधिकार है कि वह प्रधान की जगह मीटिग की अध्यक्षता करते हुए एजीएम की कायर्वाही संपन्न कर सकते हैं।
एजीएम क्यों है ज़रूरी, पुरानी टीम व चुनावों के लिए कैसे है महत्वपूर्ण ?
जिमखाना के संविधान में एजीएम इसलिए ज़रूरी है, क्योंकि एजीएम के अंदर ही पुरानी टीम अपने कार्यकाल का लेखा-जोखा प्रस्तुत करता है और बैलंस शीट क्लब सदस्यों द्वारा अप्रूव की जाती है।इसके साथ ही चुनावों की औपचारिक घोषणा भी की जाती है। एजीएम वाले दिन से ही चुनावों की स्थिति साफ होने लगती है, उम्मीदवारों को लेकर क्लब सदस्यों को थोड़ी-बहुत जानकारी मिल जाती है। इसलिए एजीएम का काफी महत्व है।
एडहाक कमेटी को लेकर व पुरानी टीम के कार्यकाल को लेकर क्या कहता है संविधान ?
क्लब संविधान में एडहाक कमेटी के गठन को लेकर कहीं कुछ भी साफ नहीं है। और जहां तक पुरानी कमेटी के कार्यकाल का सवाल है तो रूल नं 50 के अनुसार कार्यकाल को लेकर 2 साल की अवधि का उल्लेख ज़रूर किया गया है। मगर जैसी स्थित अब बनी हुई है जिसमें एजीएम तय समय पर नहीं हो सकी है और फिल्हाल नई तारीख की घोषणा नहीं हुई है।ऐसे में पुरानी टीम काम जारी रख सकती है या नहीं इसको लेकर भी संविधान में साफतौर पर कुछ नहीं लिखा है। इसीलिए जब तक एजीएम नहीं होती है, तब तक पुरानी टीम काम करती रहती है और ऐसा भी नहीं है कि बिना एजीएम के कोई भी सदस्य पुरानी टीम को बाहर का रास्ता दिखा सकता है या फिर रूटीन काम करने से मना कर सकता है।क्योंकि क्लब में डेली-रूटीन के कई काम हैं जो किसी कीमत पर रोके नहीं जा सकते और किसी न किसी को तो वह काम देखने ही पड़ते हैं।
कब हो सकती है एजीएम ?
क्लब सूत्रों की मानें तो 1-2 दिन के अंदर एजीएम को लेकर कोई ठोस फैसला लिया जा सकता है और इस बात को लेकर औपचारिक घोषणा भी की जा सकती है। क्योंकि बिना एजीएम के सीधे चुनावों की घोषणा भी नहीं की जा सकती है। एजीएम के उपरांत आमतौर पर चुनावों में 30 से 45 दिन का समय लग ही जाता है। और तब तक क्लब प्रधान एडहाक कमेटी का गठन भी कर सकते हैं। इसअवधि के दौरान क्लब सदस्यों द्वारा अपने-अपने बकाया जमा करवाए जाते हैं जिसके बाद फाईनल वोटर सूचि बनती है और चुनावी प्रक्रिया आरंभ होती है।
वैसे एजीएम कब होती है और चुनाव कब होते है,इसको लेकर तो आने वाला समय ही बेहतर बता सकता है, मगर इतना तय है कि जब तक एजीएम की घोषणा नहीं होती तब तक चुनावी हलचल जो कुछ दिन पहले तक क्लब में दिखाई दे रही थी, वह नहीं दिखाई देगी।
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