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PROGRESSIVE GROUP के लिए सांप के मुंह में छिपकली वाली बनी स्थिति !

PUBLISH DATE: 05-03-2026

(जिमखाना चुनाव -  2026)


धीरज सेठ को दरकिनार करके विपन झांजी पर दांव खेलना हो रहा मुश्किल !


धीरज सेठ अपने साथ किए वायदे का हवाला देकर सैक्रेटरी पद पर चुनाव लड़ने के लिए अडिग, मनाने के सभी प्रयास हुए विफल


 


जालंधर, 5 मार्च : शहर के अति-प्रतिष्ठिक क्लब जिमखाना के सदस्य जिसमें शहर के गणमान्य, अलग-अलग क्षेत्रों के दिग्गज, प्रसिद्व उद्योगपति एवं क्लब की पूरी राजनीति को पलटने की क्षमता रखने वाले रसूखदार तक शामिल हैं। इस क्लब में चुनाव किसी भी विधानसभा या लोकसभा चुनावों से अधिक रोचक होते हैं। लाखों-करोड़ों रूपए चंद हज़ार सदस्यों वाले इस क्लब में वोट लेने के लिए खर्च कर दिए जाते हैं। यहां पिछले लंबे समय से हर बार चुनावों के अंदर दो चिर-प्रतिद्वंदी ग्रुपों "PROGRESSIVE" और "ACHIEVERS" के बीच ही मुकाबला होता रहा है। और दोनों ग्रुपों से अलग-अलग पदों पर जीतकर आने वाले पदाधिकारी 2 साल एक साथ मिलकर काम करते हैं।


इस बार फिल्हाल दोनों ग्रुपों के गठन को लेकर काफी असमंजस देखने को मिल रहा है, क्योंकि चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की तस्वीर साफ तौर पर नज़र नहीं आ रही है। सैक्रेटरी, जूनियर वाईस प्रधान व ज्वाईंट सैक्रेटरी के पद पर दोनों ग्रुपों में एक से अधिक चाहवान होने के कारण किसी प्रकार का ठोस निर्णय नही लिया जा सका है। क्लब सूत्रों की मानें तो दोनों ग्रुपों के किंगमेकर जो क्लब की राजनीति में उल्टफेर करने का दावा करते हैं, वह बहुत जलदी ही इस बात की कवायद शुरू करने जा रहे हैं कि किसी तरह से सभी चाहवान उम्मीदवारों में एक आमराय बनाकर सर्वसम्मति से उम्मीदवारों का चयन किया जा सके, ताकि किसी प्रकार के त्रिकोणीय मुकाबले से बचा जा सके।


 



 


फिल्हाल सबसे रोचक स्थिति प्रोग्रैसिव ग्रुप के अंदर बनी हुई है जहां पर विपन झांजी के मैदान में उतरने से सारे समीकरण बदलते हुए दिखाई दे रहे हैं। मगर वहीं दसूरी तरफ क्लब के पुराने व मंजे हुए खिलाड़ी धीरज सेठ जो अपनी बेबाक छवि के लिए जाने जाते हैं और उनके परिवार का क्लब के चुनावों में एक अलग मुकाम रहता है, जिसके चलते चुनावों के फैसले पर उनका कंट्रोल भी देखने को मिलता रह है। पिछली बार संदीप बहल की जीत में भी धीरज सेठ एवं उनके गुट का काफी बड़ा रोल देखने को मिला था और इसी कारण ग्रुप की तरफ से उनको अगली बार बतौर सैक्रेटरी चुनाव लड़वाने का वायदा भी किया गया था। इसी वायदे के चलते इस बार धीरज सेठ खुद को सैक्रेटरी पद का उम्मीदवार देख रहे हैं। मगर विपन झांजी की एंट्री ने उनके साथ एक बार फिर से विश्वासघात जैसे हालात पैदा कर दिए हैं।


शायद यही कारण है कि पिछले कई दिनो से लगातार अलग-अलग जगह क्लब के कई रसूखदारों द्वारा मीटिंगे करके धीरज सेठ को मनाने का प्रयास किया जा रहा है। मगर वह टस से मस होने का नाम नहीं ले रहे हैं। धीरज सेठ बतौर सैक्रेटरी चुनाव लड़ने के लिए अडिग दिखाई दे रहे हैं और अगर प्रोग्रैसिव ग्रुप द्वारा उनके साथ विश्वासघात किया जाता है तो शायद उन्हें इसका बड़ा खामियाजा भी भुगतना पड़ सकता है।


क्लब सूत्रों की मानें तो मौजूदा समय के अंदर प्रोग्रैसिव ग्रुप के कर्ता-धर्ताओं के लिए सांप के मुंह में छिपकली जैसे हालाता बने हुए दिखाई दे रहे हैं। जिसके चलते वह न तो सीधे तौर पर धीरज सेठ को इंकार कर पा रहे हैं, न ही स्वीकृति प्रदान कर पा रहे हैं।