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जिमखाना क्लब में शुरू हुई चुनावी सुगबुगाहट, सैक्रेटरी सीट पर सबसे अधिक हलचल !

PUBLISH DATE: 20-02-2026

एक अनार और 6 बीमार वाले बने हालात, काफी रोचक बन रहे समीकरण, कई बड़े उल्टफेर की संभावना


 


JULLUNDUR GYMKHANA CLUB..ELECTIONS..HONY.SECRETAY जालंधर, 20 फरवरी : जालंधर के अति-प्रतिष्ठित एवं "सैकिंड होम" (SECOND HOME)  की उपाधी से प्रसिद्व जिमखाना क्लब में अब चुनावी सुगबुगाहट सुनाई देनी आरंभ हो चुकी है। इस बार के चुनावों में अपनी किस्मत आज़माने के इच्छुक उम्मीदवारों द्वारा चुनावी शतरंज की बिसात बिछाई जा चुकी है और हर कोई अपने हक में चुनाव प्रचार करने के लिए ज़मीन तैयार करने में जुट चुका है। इस बार के चुनाव पिछले चुनावों से काफी अलग एवं रोचक होने वाले हैं। 


सैक्रेटरी की सीट पर एक अनार और 6 बीमार वाली बनी स्थिति 


सबसे ज्यादा हलचल क्लब की एहम मानी जाने वाली सीट यानि कि होनरेरी सैक्रेटरी पर दिखाई दे रही है। यहां एक अनार और 6 बीमार वाली स्थिति देखने को मिल रही है। 


 



इस पद पर अपनी दावेदारी ठोकने वालों में सबसे पहला नाम है अमित कुकरेजा का जिन्हें क्लब में इस पोस्ट के लिए सबसे ताकतवर उम्मीदवार का दर्जा दिया जा रहा है और कहा जा रहा है कि इन्हें हराने के बारे में सोचना ही लोहे के चने चबाने समान है। हालांकि मौजूदा समय के अंदर यह किसी ग्रुप विशेष के साथ खुद को न जोड़कर अकेले ही अपनी जीत की राह तलाशते हुए दिखाई दे रहे हैं। मगर आने वाले कुछ दिनों में जब ग्रुपों का गठन होगा तो समीकरण बदलते हुए भी दिखाई दे सकते हैं। मगर इतना तय माना जा रहा है कि यह इस बार हर हाल में सैक्रेटरी के पद पर ही चुनाव लड़ेंगे और अपने प्रतिद्वंदियों को धूल चटाने के लिए एड़ी-चोटी का ज़ोर लगाएंगे


 



 


दूसरा नाम है एसपीएस (राजू) विर्क का जो क्लब की राजनीति में कई बार उल्ट-फेर करने की स्थिति में दिखाई देते रहे हैं, मगर किसी न किसी कारणवश यह वह मुकाम हासिल नहीं कर सके, जिसके वह सही मायने में हकदार हैं। पंजाब की लैदर इंडस्ट्री में अपना अच्छा रसूख रखने वाले राजू विर्क क्लब के एक वर्ग में काफी पसंद किए जाते हैं, मगर क्लब की राजनीति में अपनी पैठ बनाए रखने वाले किंगमेकर द्वारा हर बार इन्हें किसी न किसी अन्य सदस्य के लिए कुर्बानी देने के लिए मनाया जाता रहा है। इस बार वह किंगमेकर की बात मानते हैं और वाईस प्रैज़ीडैंट के पद पर चुनाव लड़ने के लिए मान जाते हैं या फिर अकेले अपने दम पर बिना किसी भी परिणाम की परवाह किए हुए सैक्रेटरी पद पर चुनाव लड़ते हैं, यह तो आने वाला वक्त ही बेहतर बताएगा। 


 



 


 


जबकि तीसरा नाम है पहले इस पद पर रह चुके तरूण सिक्का का। तरूण सिक्का जो पहले भी सैक्रेटरी पद पर अपनी सेवाएं प्रदान कर चुके हैं और इन्हें क्लब में किंगमेकर की भूमिका निभाने वाले मौजूदा समय में आम आदमी पार्टी के हल्का सैट्रल के इंचार्ज उद्योगपति नितिन कोहली का काफी करीबी माना जाता है। तरूण सिक्का एक बार फिर से अपनी किस्मत आजमाने के लिए तैयार हैं और चुनावों से पहले वह अपने हक में प्रचार करने के लिए अभी से जुट चुके हैं। तरूण सिक्का का मानना है कि क्लब में बतौर सैक्रेटरी क्लब सदस्यों के लिए वह काफी अच्छा काम कर सकते हैं और करोना काल में जो काम करने रह गए थे, अपने दूसरे कार्यकाल में वह बखूबी कर सकते हैं। 


 



 


चौथा नाम सबसे खास है क्योंकि पिछले कई सालों से यह सदस्य क्लब में अपनी एक अलग पहचान बना चुके हैं और इस बार उन्हें अपने ग्रुप से भी खासा समर्थन प्राप्त है। यह नाम है प्रोफैसर विपन झांजी का। प्रो. विपन झांजी जिन्हें एक हंसमुख एवं मिलनसार व्यक्तित्व के तौर पर जाना जाता है, पिछले लंबे समय से क्लब की राजनीती में एक ध्रुव तारे की भांती चमकते हुए दिखाई दे रहे हैं। किसी भी ग्रुप का उम्मीदवार हो, कोई भी बड़ा या छोटा लीडर हो सबके साथ प्रो. विपन झांजी का प्यार एक जैसा दिखाई देता है। प्रो. विपन झांजी का सादा व्यवहार ही उनकी ताकत है जिसके चलते उन्हें एक बेहद मज़बूत व सशक्त उम्मीदवार के तौर पर देखा जा रहा है। यह अकेले अपने दम पर ही कई बड़े उल्टफेर करने का दम रखते हैं और इनके मैदान में कूदने से कई बड़े चेहरों के मनसूबों पर पानी फिर सकता है। 


 



 


पांचवा नाम है उस सदस्य का, जिन्हें अपने ग्रुप द्वारा इस पद पर चुनाव लड़ने का आश्वासन व वायदा दिया गया, मगर बाद में दूध से बाल की तरह निकाल फैंका गया। जी हां यह नाम है क्लब की राजनीति मे अपना एक अलग मुकाम बनाने वाले युवा सदस्य धीरज सेठ का। धीरज सेठ जो किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं और जिनके परिवार का क्लब में एक अलग व बेहद ऊंचा स्थान रहा है, उन्हें क्लब सदस्यों के बीच काफी सराहा जाता रहा है। कई बार उन्होंने अपने ग्रुप की भलाई के लिए कुर्बानी देते हुए अपनी उम्मीदवारी का त्याग किया है और जब वायदा, भरोसा व बाकायदा तौर पर ऐलान करने के बाद भी धोखा मिला, तब भी उन्होंने क्लब एवं सदस्यों की बेहतरी के लिए किसी प्रकार की गंदी राजनीति न करते हुए चुप रहना बेहतर समझा। मगर इस बार धीरज सेठ अपना मन बना चुके हैं और वह सैक्रेटरी के पद पर अपनी दावेदारी मज़बूती से ठोकने के लिए पूरी तैयारी भी कर चुके हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार धीरज सेठ अगर मैदान में उतरते हैं तो कई उम्मीदवार चुनाव से पहले ही खुद को हारा हुआ मान सकते हैं। 


 



 


और छठा व आखिरी नाम है क्लब में नारी शक्ति का परचम लहराने वाली अनु माटा का। अनु माटा जो लंबे समय से क्लब राजनीति में अकेली महिला पदाधिकारी के रूप में काफी ख्याति अर्जित कर चुकी हैं और सुमित शर्मा जैसे मज़बूत उम्मीदवार को हराकर एक अलग मुकाम हासिल कर चुकी हैं, अब वह सैक्रेटरी के तौर पर खुद को पेश करके क्लब की राजनीति में एक नई मिसाल कायम करना चाहती हैं। उनका मानना है कि अगर कोई भी पुरूष पदाधिकारी खुद को बतौर सैक्रेटरी के पद पर उम्मीदवार के तौर पर देख सकते हैं तो एक महिला के लिए इस पद पर आना पूरे क्लब की महिलाओं के लिए एक मिसाल बनेगा और महिलाएं बढ़चढ़कर क्लब राजनीति में भाग लेने के लिए प्रेरित होंगी।


 


अब कौन सा सदस्य सैक्रेटरी पद पर दावेदारी पेश करता है, और कौन केवल दावेदारी पेश करके बाद में पीछे हट जाता है। कौन इस रेस में आखिर तक टिका रहता है और किसके ऊपर कल्ब सदस्य अपना विश्वास जताते हैं। यह तो आने वाला समय ही बेहतर बता सकता है। मगर फिल्हाल यह कहना गलत नहीं होगा कि क्लब के चुनावों को लेकर काफी हलचल बन चुकी है जो आने वाले समय में और बड़ती दिखाई देगी और कई नए समीकरण बनेंगे, जिसको लेकर क्लब सदस्यों में चर्चाओं का दौर आरंभ हो चुका है।