चीफ विजिलैंस अफसर की जालंधर में बड़ी रेड - 500 अवैध बिल्डिंगों पर पैनी नज़र !
50 शिकायतों पर जानी ज़मीनी हकीकत, चौकिंग करके की फोटोग्राफी
नगर निगम से रिकॉर्ड तलब, दिनभर चला हाई-प्रोफाइल ड्रामा
जालंधर, 20 मार्च : पंजाब लोकल बॉडी विभाग की विजिलैंस टीम ने शुक्रवार को जालंधर में अवैध निर्माणों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए शहर भर में औचक निरीक्षण (रेड) किया। चीफ विजीलैंस अफसर कुलविंदर सिंह और सीनियर विजिलैंस अफसर (एमटीपी) नरेश कुमार के नेतृत्व में 6 सदस्यीय टीम ने करीब 500 अवैध बिल्डिंगों से जुड़ी शिकायतों के आधार पर जांच शुरू की, जिससे पूरे दिन शहर में हड़कंप की स्थिति बनी रही।
सबसे पहले विवादित होटल पर छापा
विजिलैंस टीम ने अपनी कार्रवाई की शुरुआत जालंधर-फगवाड़ा हाईवे स्थित विवादित होटल मैरीटन से की। यहां टीम ने होटल प्रबंधन से निर्माण से जुड़े दस्तावेज और रिकॉर्ड तलब किए।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि होटल के साथ ही एक नया निर्माणाधीन प्रोजेक्ट जारी है, जिस पर करीब 5.50 करोड़ रुपए का बिजली बिल बकाया है और रजिस्ट्री पर रोक के बावजूद निर्माण कार्य धड़ल्ले से जारी है। इस मामले को लेकर टीम ने मौके पर ही पूछताछ की।
नगर निगम में दी दस्तक, रिकॉर्ड मांगा
इसके बाद विजिलैंस टीम सीधे नगर निगम दफ्तर पहुंची, जहां एक आरटीआई एक्टिविस्ट करणवीर सिंह की शिकायत के आधार पर करीब 50 बिल्डिंगों और 10 अवैध कालोनियों का रिकॉर्ड मांगा गया। सूत्रों के मुताबिक, मेयर और कमिश्नर ने टीम से जांच की सूची लेकर संबंधित रिकॉर्ड उपलब्ध करवाने की बात कही। हालांकि, बाद में पूरा रिकॉर्ड तत्काल उपलब्ध नहीं कराया जा सका और एक सप्ताह का समय मांगा गया।
शहरभर में ताबड़तोड़ चैकिंग
मीटिंग के बाद टीम ने शहर के विभिन्न इलाकों में जाकर मौके पर जांच शुरू की :
ब्रांडरथ रोड: नए बन रहे शोरूम की जांच
फुटबाल चौक: निर्माणाधीन बिल्डिंग की फोटोग्राफी
जेपी नगर रोड: 50-60 नई दुकानों की चैकिंग
बस्ती पीर दाद रोड: 30-40 दुकानों का निरीक्षण
वरियाणा कॉम्प्लेक्स: अवैध फैक्ट्रियों का डाटा खंगाला
कालासंघिया रोड (चोपड़ा कॉलोनी के पास): लोकपाल में लंबित अवैध कॉलोनी की जांच
2-2 मरले की 30 कोठियां: निर्माणाधीन मकानों की पड़ताल
नकोदर रोड: अवैध शोरूम और दुकानों की चैकिंग
दिनभर चला राजनीतिक दबाव का खेल
सूत्रों के अनुसार, इस कार्रवाई के दौरान हाई-प्रोफाइल राजनीतिक दबाव भी देखने को मिला। एक विधायक और उसके करीबी लोगों द्वारा मेयर, कमिश्नर और विजिलैंस टीम पर यह दबाव बनाया गया कि उनके विधानसभा क्षेत्र में जांच न की जाए, ताकि वोट बैंक प्रभावित न हो। बताया जा रहा है कि पूरे दिन नगर निगम अधिकारियों के फोन लगातार बजते रहे और जांच को रोकने के प्रयास किए जाते रहे।
रिकॉर्ड देने में टालमटोल
हैरानी की बात यह रही कि चंडीगढ़ से विशेष रूप से आई विजिलैंस टीम को मांगा गया रिकॉर्ड तत्काल उपलब्ध नहीं कराया गया। नगर निगम ने एक सप्ताह की मोहलत मांगते हुए कहा कि रिकॉर्ड चंडीगढ़ भेज दिया जाएगा।
सवालों के घेरे में नगर निगम
जालंधर नगर निगम पहले से ही भ्रष्टाचार और घोटालों के आरोपों को लेकर चर्चा में रहा है। ऐसे में यह कार्रवाई एक बड़ा अवसर थी कि निगम अपनी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता दिखाए, लेकिन रिकॉर्ड उपलब्ध न कर पाने से एक बार फिर उसकी कार्यशैली पर सवाल खड़े हो गए हैं।
शहर में लंबे समय से अवैध निर्माणों के कारण सरकारी खजाने को भारी नुकसान होने की बातें सामने आती रही हैं। अब देखना होगा कि विजिलैंस की यह कार्रवाई आगे क्या रूप लेती है और जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होती है।
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