जाली वसीयत बनाई, 80 मरले सरकारी ज़मीन को बेचकर करोड़ों रूपए का हुआ फर्जीवाड़ा !
शहर के कुछ रसूखदारों ने तहसील के कुछ अधिकारियों व कर्मचारियों की सहायता से रचा पूरा खेल
सीएम के पास पहुंची शिकायत, जल्दी ही होगा जालसाजी के इस खेल का पर्दाफाश
जालंधर : शहर में सरकारी ज़मीन से जुड़े एक बड़े फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है, जिसमें कथित तौर पर जाली वसीयत तैयार कर लगभग 80 मरले सरकारी ज़मीन को बेचकर करोड़ों रुपए का खेल किए जाने के आरोप लगे हैं। इस पूरे मामले में शहर के कुछ रसूखदार लोगों और तहसील के कुछ अधिकारियों-कर्मचारियों की मिलीभगत की चर्चा तेज़ हो गई है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार एक व्यक्ति ने अपनी मृतक माता के नाम पर जाली वसीयत तैयार कर सरकारी ज़मीन को अपना बताते हुए उसे बेचने की योजना बनाई। बताया जा रहा है कि उक्त महिला का निधन करीब 15 वर्ष पहले हो चुका था, लेकिन वर्ष 2021 में दो गवाहों के हस्ताक्षर करवाकर एक अन-रजिस्टर्ड वसीयत तैयार की गई। आरोप है कि बाद में तहसील स्तर पर सेटिंग कर और पैसों के दम पर उसी वसीयत को रजिस्टर्ड करवा लिया गया, जिसके आधार पर करोड़ों रुपये की सरकारी ज़मीन का सौदा कर दिया गया।
रसूखदारों की मिलीभगत की चर्चा
सूत्रों का कहना है कि इस पूरे मामले में शहर के कुछ प्रभावशाली लोगों की भूमिका भी सामने आ रही है, जिन्होंने कथित तौर पर तहसील के कुछ अधिकारियों व कर्मचारियों को प्रभावित कर पूरे खेल को अंजाम दिलवाया। मामला तब सामने आया जब इस कथित सौदे में शामिल लोगों के बीच मनमुटाव हो गया, जिसके बाद अंदरूनी जानकारी बाहर आने लगी और शहर में इस पूरे प्रकरण को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया।
गवाह भी मुकरा, फोरेंसिक जांच से खुल सकते हैं राज
हाट न्यूज़ इंडिया को मिली जानकारी के अनुसार वसीयत पर जिन दो व्यक्तियों को गवाह बनाया गया था, उनमें से एक गवाह ने अब यह कहकर पल्ला झाड़ लिया है कि हस्ताक्षर उसके नहीं हैं। ऐसे में यदि दस्तावेजों और हस्ताक्षरों की फोरेंसिक जांच करवाई जाती है तो यह साफ हो सकता है कि वसीयत वास्तव में पुरानी है या बाद में तैयार की गई। यदि दस्तावेज जाली पाए गए तो इस मामले में शामिल लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज हो सकता है।
मामले को दबाने की हो रही कोशिश ?
सूत्रों का यह भी दावा है कि तहसील का एक कर्मचारी इस पूरे मामले को दबाने के लिए एड़ी-चोटी का ज़ोर लगा रहा है, लेकिन अब यह मामला उच्च स्तर तक पहुंच चुका है। बताया जा रहा है कि इस फर्जीवाड़े को लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय तक शिकायत पहुंच चुकी है, जिसके बाद प्रशासनिक स्तर पर हलचल तेज़ हो गई है। क्योंकि अगले साल चुनाव है और आप सरकार किसी कीमत पर बर्दाशत नहीं करेगी कि सरकारी ज़मीन के इतने बड़े फर्जीवाड़े को ऐसे ही छोड़ दिया जाए।
कई सवालों के जवाब अभी भी हैं बाकी ?
क्या जाली वसीयत और हस्ताक्षरों की फोरेंसिक जांच करवाई जाएगी ?
क्या करोड़ों की सरकारी ज़मीन दोबारा सरकार के कब्जे में आएगी ?
और क्या इस पूरे फर्जीवाड़े में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई होगी ?
फिलहाल यह मामला शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है और आने वाले दिनों में इस कथित सरकारी ज़मीन घोटाले का बड़ा खुलासा होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।
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