भाड़ में जाए जनता अपना काम बनता, क्लब सदस्यों को ठगने के लिए रची जा रही साजिश
खुद को भगवान समझने लगे चिर-विरोधी ग्रुपों के कर्ता-धर्ता, बिना चुनाव सत्ता पर काबिज़ होने का बना रहे प्लान
सदस्यों में गहरा रोष, निर्दलीय या थर्ड फ्रंट बनाकर फेर सकते हैं इनके अरमानों पर पानी
जालंधर, 13 मार्च : जिमखाना क्लब के बहुप्रतीक्षित चुनावों की औपचारिक घोषणा और एजीएम में अब केवल एक दिन का समय शेष रह गया है। ऐसे में क्लब की सियासत अचानक गर्मा गई है। क्लब के दो पुराने और चिर-विरोधी ग्रुपों पर आरोप लग रहे हैं कि वे “भाड़ में जाए जनता – अपना काम बनता” वाली नीति अपनाते हुए क्लब के आम सदस्यों को दरकिनार कर सत्ता पर काबिज़ होने की साजिश रच रहे हैं।
हालांकि इस तरह की चर्चाओं ने क्लब के अंदर माहौल को काफी गरमा दिया है। कई सदस्यों का मानना है कि अगर पुराने ग्रुपों ने मिलकर कोई समझौता किया या चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की, तो इसका कड़ा विरोध किया जाएगा। अब सभी की निगाहें एजीएम और चुनावी प्रक्रिया पर टिकी हुई हैं। देखना यह होगा कि क्या पुराने ग्रुप अपनी रणनीति में सफल होते हैं या फिर सदस्यों का संभावित थर्ड फ्रंट उनके अरमानों पर पानी फेर देता है।
आम सदस्यों की राय या लोकतांत्रिक प्रक्रिया की कोई परवाह नहीं रही बाकी
क्लब सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पिछले कई दिनों से दोनों ग्रुपों के प्रमुख कर्ता-धर्ता लगातार बैठकें कर रहे हैं और आगामी चुनावों को लेकर अंदरखाते रणनीति तैयार की जा रही है। चर्चा है कि कुछ लोग बिना चुनाव के ही क्लब की बागडोर अपने हाथ में लेने के लिए रास्ता तलाश रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर क्लब के कई सदस्य खासे नाराज़ बताए जा रहे हैं।
सूत्रों का कहना है कि वर्षों से क्लब की राजनीति पर कब्जा जमाए बैठे कुछ चेहरे अब खुद को इतना प्रभावशाली मानने लगे हैं कि उन्हें आम सदस्यों की राय या लोकतांत्रिक प्रक्रिया की कोई परवाह नहीं रह गई। आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि दोनों ग्रुप अपने-अपने हित साधने के लिए पर्दे के पीछे समझौते की कोशिश कर रहे हैं, ताकि सत्ता की कुर्सी आपस में बांटकर चुनावी मुकाबले से बचा जा सके।
कुछ उम्मीदवारो को खुद ही कमज़ोर ठहराकर बाहर करने की चल रही तैयारी
क्लब सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार दोनों ग्रुपों के कर्ता-धर्ता इस बात पर भी विचार कर रहे हैं कि जो उम्मीदवार उनकी नज़रों में कमज़ोर हैं या फिर उनके अधिक करीबी नहीं है, उन्हें इस बार बाहर का रास्ता दिखाकर बिना चुनाव लड़े ही जीत प्राप्त की जा सके।
ऐसे उम्मीदवारों मे सबसे पहला नाम अनु माटा का है, जिनको किसी भी तरीके से मनाकर बाहर बैठाने या फिर एगज़ीक्यूटिव पर चुनाव लड़ाने पर विचार किया जा रहा है। दूसरा नाम है तरूण सिक्का का, जिनको अमित कुकरेजा से कमज़ोर उम्मीदवार समझकर इस बार चुनाव न लड़ने के लिए कहा जा रहा है। वहीं तीसरा नाम है धीरज सेठ का जिन्हें पहले भी दो बार धोखा देकर चुनावी रेस से बाहर किया जा चुका है, उन्हें इस बार भी त्याग की मूर्ति बनने का दबाव डाला जा रहा है। इसके इलावा भी कई अन्य उम्मीदवार हैं जिन्हें फिल्हाल केवल लालीपाल देकर बहलाया जा रहा है ताकि वह विरोध का स्वर न उठा सकें।
एक निर्दलीय या “थर्ड फ्रंट” बनाने की भी चर्चा भी हुई तेज
इसी बीच क्लब के अंदर एक निर्दलीय या “थर्ड फ्रंट” बनाने की भी चर्चा तेज हो गई है। कुछ सक्रिय सदस्य इस विकल्प पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं, ताकि क्लब की राजनीति में पारदर्शिता लाई जा सके और पुराने गुटों की पकड़ को चुनौती दी जा सके। क्लब के कई वरिष्ठ सदस्यों का कहना है कि जिमखाना जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सम्मान होना चाहिए और चुनाव निष्पक्ष तरीके से करवाए जाने चाहिए। उनका मानना है कि अगर किसी भी तरह की साजिश या जोड़-तोड़ की राजनीति सामने आई तो सदस्य एकजुट होकर इसका जवाब देंगे।
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